संजीवनी अस्पताल की हालत खस्ता स्टाफ मौजूद न होने से भटक रहीं गर्भवती महिलाएं और नौनिहाल बच्चे।

 संजीवनी क्लीनिक की हालत खस्ता स्टाफ मौजूद न होने से भटक रहीं गर्भवती महिलाएं और नौनिहाल बच्चे।


रहली - यूं तो सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को सरल और सहज बनाने के लिए अथक प्रयास कर रही है पर प्रशासनिक ढांचा उतना ही कमजोर है रहली के संजीवनी अस्पताल को ही देख ले वैसे तो मंगलवार का दिन टीकाकरण के लिए निर्धारित है जहां गर्भवति महिलाओं और बच्चों का टीकाकरण किया जाता है।पर रहली में जहां पर समूचे प्रशासनिक अधिकारी बैठे हैं।वहीं बीचो-बीच बने संजीवनी अस्पताल में एक भी कर्मचारी और नर्सिंग स्टॉफ मौजूद नहीं था।लोग अपने साथ टीकाकरण के लिए लेकर आए गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रहली और संजीवनी के लगातार चक्कर काटते रहे।






     परेशान लोगों ने बताया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र वाले संजीवनी भेज रहे हैं और संजीवनी में स्टॉफ ही मौजूद नहीं है तो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खुद से वैक्सीन लेकर जाना पड़ रहा हैं हम लोग दिन भर से दोनों अस्पतालों के बीच की दो किलोमीटर की दूरी को नाप रहे। 

       जब इसकी जानकारी संजीवनी अस्पताल के डॉक्टर अमन प्रजापति से ली गई तो उन्होंने स्टाफ न होने का हवाला देते हुए बताया कि यह समस्या दो-तीन दिन से है। उन्होंने बताया कि कुछ स्टॉफ मातृत्व अवकाश तो किसी की सेवा निवृत्ति है। हैरत की बात तो यह है कि वह स्वयं भी संजीवनी में उपस्थित नहीं थे। जब उनकी स्वयं की उपस्थिति के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि मैं विभागीय कार्य से बीएमओ साब के पास गया हूं।

       हालांकि जब बीएमओ डॉक्टर सुयश सिंघई से डॉक्टर अमन प्रजापति की उपस्थिति के संबंध में जानकारी चाही गई तो उनके द्वारा फोन ही रिसीव नहीं किया गया। 

          कुल मिलाकर के बात यह है की सब अपने अपने दायित्व से बचते नजर आ रहे हैं स्वास्थ सेवाओं के नाम पर लगातार लोगों को परेशान किया जा रहा है स्वास्थ्य सेवाएं किसी के कंट्रोल में नहीं है नीचे से लेकर ऊपर तक के अधिकारी केवल और केवल अनियमितता में लिप्त हैं।

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